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शुन्तारो तानीकावा की कविता
जब वह नाश्ता बनाती तो वह नाश्ते पर कविता लिखता
जब वह जंगली बेर तोड़ती तो वह जंगली बेरों पर कविता लिखता
जब वह अपने वस्त्र उतारती तो वह उसके सौंदर्य पर कविता लिखता


इम्तियाज़ धारकर की कविताएँ
सभी हत्यारे ऐसे मुखौटे पहने हुए हैं
जिन पर भगवान का चेहरा बना है




दुन्या मिखाइल की कविताएँ
लालटेनें रात की सच्ची मुरीद हैं
उनमें सितारों से ज़्यादा सब्र है
वे जलती रहती हैं सुबह तक।


निकानोर पार्रा की कविताएँ
गुज़र चुका है भूतकाल
वह केवल स्मृति में है:
एक नोंचे हुए गुलाब से
एक और पंखुड़ी नहीं खींची जा सकती


चार्ली ब्राइस की कविताएँ
यदि तुम्हारे मस्तिष्क का
आधा हिस्सा सोया होता
तो क्या तुम जी सकते थे
उस गीत के साथ
कहीं स्वतंत्र भूमि पर
उतरते और देख पाते
कि तुम वास्तव में कौन हो?


नाज़िम हिकमत की कविताएँ
मेरा विश्वास करो
हम देखेंगे ख़ूबसूरत दिन
बच्चो, हम देखेंगे चमकीले दिन
हम ले जाएंगे अपनी स्पीडबोट्स खुले समुद्र में बच्चो
हम उन्हें ले जाएंगे चमकीले नीले समुद्र में...


चेस्लाव मिलोश की कविताएँ
नदियों के नाम रह जाते हैं तुम्हारे साथ।
कैसी अंतहीन लगती हैं वे नदियाँ!
तुम्हारे खेत हो जाते हैं बंजर
बदल जाता है शहर की मीनारों का रूप
तुम खड़े रह जाते हो किनारे, निःशब्द।


मलाइका राय की कविताएँ
होती है मोहब्बत में हार,
बे-आबरू, कूचे से
निकलना पड़ता है।
खिलाना भी,
खाना पड़ता है अपना गोश्त,
इश्क़ निगलना पड़ता है।


रसूल हमज़ातोव की कविताएँ
बुकिंग क्लर्क, मैं हूँ तुम्हारा शुक्रगुज़ार
कि तुमने उसे सीट दी मेरी बग़ल में
जिससे हमने देखे दृश्य
डिब्बे की खिड़की जितने विस्तृत।


मोमिना रज़ा की कविताएँ
हमारे बीच एक ज़बान पैदा हुई थी,
ख़ामोशी और तड़प से
मगर मैं इसे अकेली ही बोलती हूँ


क्रिस्टीना पेकोज की कविताएँ
सेब का दरख़्त
जिसे लगवाने में उसने मदद की थी
फलने को तैयार है फिर से


ध्यान सिंह की कविताएँ
मैं गुलशन नहीं हूँ।
यह तस्दीक़ तो
मेरा आलोचक ही कर सकता है।
आलोचक :
जो पतझड़ की प्रतीक्षा कर रहा है।


टी एस एलियट की कविताएँ
बीता हुआ समय और आने वाला समय
जो हो सकता था और जो होता रहा
एक ही सिरे की ओर इशारा करते हैं, जो सदा वर्तमान है।


रोक डाल्टन की कविताएँ
मैं तुम्हारा स्वागत करता हूँ कविता
बहुत शुक्रगुज़ार हूँ आज तुमसे मुलाक़ात के लिए
(ज़िंदगी और किताबों में)
तुम्हारा वजूद सिर्फ़ उदासी के चकाचौंध कर देने वाले
भव्य अलंकरण के लिए ही नहीं


रॉबर्ट ब्लाय की कविताएँ
कुछ लोग देखते हैं आपको
कुछ लोग कभी ध्यान भी नहीं देते आप पर
कुछ लोग अपने हाथों में लेना चाहते हैं आपका हाथ
कुछ लोग मर जाते हैं रात में




टॉमस ट्रांसट्रोमर की कविताएँ
चर्च के भीतर है एक भिक्षा-पात्र
जो धीरे-धीरे उठता है फ़र्श से
और तैरने लगता है भक्तों के बीच।




गिओकोंडा बेली की कविताएँ
अगर तुम मजबूत औरत हो
युद्ध की तैयारी करो:
सीखो अकेले रहना
बिना किसी डर घुप्प अंधेरे में सोना
गरजते तूफान में किसी से रस्सी फेंकने की अपेक्षा मत करो
धारा के विरुद्ध तैरना सीखो
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