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निकानोर पार्रा की कविताएँ

  • 18 hours ago
  • 5 min read


निकानोर पार्रा की कविताएँ 
अनुवाद : देवेश पथ सारिया 

कुछ वैसा ही 


पार्रा हँसता है जैसे

उसे नरक की सजा मिली हो

पर कवि कब नहीं हँसते थे?

कम-से-कम वह अपना हँसना स्वीकारता तो है 


कवि वर्षों गुज़ार देते हैं

या कम-से-कम प्रतीत होते हैं गुज़ारते हुए 

बिना किसी परिकल्पना के

जैसे सब कुछ घटित हो रहा अपने आप


अब पार्रा रोता है

भूलकर कि वह एक प्रतिकवि है


.... 


तनाव मत लो 

कोई नहीं पढता आजकल कविताएँ 

अच्छी या बुरी, कैसी भी 


...... 


चार कमियों के लिए मेरी ओफ़ीलिया 

मुझे कभी माफ़ नहीं करेगी


उम्रदराज़ 

तुच्छ 

साम्यवादी 

और साहित्य का राष्ट्रीय पुरस्कार 


<मेरा परिवार शायद तुम्हें माफ़ कर भी दे 

पहली तीन कमियों के लिए 

पर चौथी के लिए हरगिज़ नहीं>


...... 


मेरी लाश और मेरी

परस्पर समझ बड़ी अद्भुत है

मेरी लाश पूछती है : 

क्या तुम ईश्वर में यक़ीन रखते हो?

और मैं दिल खोलकर मना करता हूँ

मेरी लाश पूछती है : क्या तुम सरकार में यक़ीन रखते हो?

और मैं हथौड़ी और दरांत से जवाब देता हूँ

मेरी लाश पूछती है : क्या तुम पुलिस में यक़ीन रखते हो?

और मैं उसके मुँह पर मुक्का जड़ देता हूँ

तब वह ताबूत से उठ खड़ी होती है

और हम बाहों-में-बाहें डाल वेदी की तरफ जाते हैं।


...... 


गृह कार्य


एक साॅनेट बनाओ

जो निम्नांकित पंचपदी पद्य से शुरू होती हो :

मैं तुमसे पहले मरना चाहता हूँ

और जो समाप्त होती हो इस पर :

मैं चाहूंगा कि पहले तुम मर जाओ


...... 


तुम जानते हो क्या हुआ

जब मैं घुटनों पर था

सलीब के सामने

ईसा के घावों को देखता हुआ?


वह मुझे देख मुस्कुराया और आँख मारी उसने!


पहले मैं सोचता था कि वह कभी नहीं‌ हँसता:

पर हाँ, अब मुझे यक़ीन हो गया है।


...... 


एक घिसा हुआ बूढ़ा

फेंकता है लाल कारनेशन के फूल 

अपनी प्यारी माँ के ताबूत पर


तुम सुन क्या रहे हो, सज्जनो और देवियो :

एक बूढ़ा शराबी

लाल कारनेशन के रिबन

बम की तरह फेंक रहा है

अपनी माँ के ताबूत पर।


...... 


मैंने धर्म के लिए खेलों को छोड़ा

(मैं हर रविवार प्रार्थना सभा में जाता था)

मैंने धर्म को छोड़ा कला के लिए

कला को गणितीय विज्ञान के लिए


छोड़ता रहा

अंततः आलोक प्राप्ति तक


और अब मैं बस गुज़रता हुआ कोई हूँ

जिसका संपूर्ण या अंशों में कोई विश्वास नहीं।


(अंग्रेज़ी अनुवाद : लिज़ वर्नर)



मैं अपना कहा सब कुछ वापस लेता हूँ


मृत्यु से पहले

इस अंतिम इच्छा का अधिकारी तो हूँ मैं—

मेरे कृपालु पाठक

इस किताब को जला देना

यह वह सब कुछ नहीं जो मैं कहना चाहता था

हालांकि इसे लिखा गया था ख़ून से

तब भी यह मेरा सटीक मंतव्य नहीं


मुझे ही अफ़सोस है सबसे ज़्यादा

हार गया हूँ मैं अपनी परछाई से

मेरे ही शब्दों ने प्रतिशोध लिया मुझसे

मुझे माफ़ कर देना पाठक, मेरे अच्छे पाठक

मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकता

एक गर्माहट भरे आलिंगन के साथ

मैं तुम्हें छोड़ रहा हूँ

जबरन लाई गई उदास मुस्कुराहट के साथ

शायद यही है मेरी हक़ीक़त 


सुनो मेरे अंतिम शब्द—

जो कुछ मैंने कहा, मैं सब वापस लेता हूँ

दुनिया भर की तमाम कड़वाहट के साथ

मैं वापस लेता हूँ सब कुछ जो मैंने कहा


(अंग्रेजी अनुवाद : मिलर विलियम्स)



चेतावनियाँ


आग लगने पर

लिफ्ट का इस्तेमाल मत करो

सीढ़ियाँ लो

जब तक कुछ और न कहा जाए


सिगरेट मत पियो

कचरा मत फैलाओ

इधर-उधर शौच मत करो

रेडियो मत बजाओ

जब तक कुछ और न कहा जाए


हर बार इस्तेमाल के बाद

शौचालय में फ्लश करो

सिर्फ़ तब नहीं

जब ट्रेन स्टेशन पर खड़ी हो

अगले मुसाफ़िर का ध्यान रखो


आगे बढ़ो ईसाई सैनिकों

दुनिया भर के कारिंदो इकट्ठे हो जाओ

खोने के लिए कुछ नहीं है

सिवाय हमारी ज़िंदगी के


और इक़बाल बुलंद करो

परम पिता का

और उसके पुत्र का

और पवित्र भूत का

जब तक और कुछ न कहा जाए


वैसे, यह भी स्पष्ट सत्य है

कि उस रचयिता के द्वारा ही

बनाया गया है सब मनुष्यों को

और अनुकंपा स्वरूप दिए गए हैं

कुछ अभिन्न अधिकार

जिनमें शामिल हैं :

जीवन, स्वतंत्रता और ख़ुश रहने की कोशिश


और अंत में— 

दो और दो होते हैं चार

जब तक कुछ और न कहा जाए।



आख़िरी प्याला


इस बात को पसंद करो या मत करो

हमारे पास गिनती के तीन विकल्प होते हैं :

भूतकाल, वर्तमान और भविष्य


और दरअसल तीन भी नहीं

क्योंकि दार्शनिक कहते हैं

गुज़र चुका है भूतकाल

वह केवल स्मृति में है:

एक नोंचे हुए गुलाब से

एक और पंखुड़ी नहीं खींची जा सकती


हमारी गड्डी में सिर्फ़ दो पत्ते बचे :

वर्तमान और भविष्य


और दो भी नहीं

क्योंकि हर कोई जानता है

कि वर्तमान का तो कोई अस्तित्व ही नहीं

वह भी एक तरह से भूतकाल बन जाता है

गुज़रा हुआ वक़्त

जैसे जवानी


संक्षेप में

हमारे पास बचा सिर्फ भविष्य :

मैं शराब का एक प्याला बनाता हूँ

उस दिन के लिए जो कभी नहीं आता

पर सिर्फ़ वही है

जिस पर हमारा बस है।


(अंग्रेज़ी अनुवाद : डेविड अंगर)



मदद!


नहीं मालूम कि मैं कैसे यहाँ आ पहुँचा :


मैं ख़ुशी से दौड़ा जा रहा था

अपनी टोपी दाएँ हाथ में पकड़े

एक चमकती तितली का पीछा करता

जिसने मुझे प्रसन्नता से पागल कर दिया था


और अचानक! मैं अटक कर गिर गया

मुझे नहीं मालूम कि बग़ीचे को क्या हुआ

बर्बाद हुआ पड़ा है यह

मेरी नाक और मुँह से ख़ून निकल रहा है


मुझे सच में नहीं मालूम कि क्या हो रहा है

मेरी मदद करो

या गोली मार दो मेरे सिर में।


(अंग्रेज़ी अनुवाद : मिलर विलियम्स)



युवा कवि


जैसा लिखते हो, लिखो

किसी भी शैली में

पुल के नीचे से बहुत ख़ून बह चुका है

इसी यक़ीन में

कि सिर्फ़ एक ही रास्ता सही है

कविता में हर बात की अनुमति है

और महज़ एक शर्त है—

ख़ाली काग़ज़ बेहतर हो उठे।


(अंग्रेज़ी अनुवाद: मिलर विलियम्स)



किसी राष्ट्रपति की मूर्ति बचेगी नहीं


किसी राष्ट्रपति की मूर्ति बचेगी नहीं

उन सटीक कबूतरों से

क्लारा सैंडोवल हमसे कहती थी :

वे कबूतर जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं।


(अंग्रेजी अनुवाद : लिज़ वर्नर)


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निकानोर पार्रा (1914-2018) चिली के एक प्रमुख कवि, भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ थे। उन्हें बीसवीं शताब्दी के लैटिन अमेरिकी साहित्य के सबसे प्रभावशाली कवियों में से एक माना जाता है। निकनोर पार्रा को ‘एंटी-पोएट्री’ (Anti-poetry) का जनक माना जाता है। उन्होंने पारंपरिक कविता की उच्च-स्तरीय, अलंकृत और रहस्यवादी शैली को अस्वीकार करते हुए एक नई शैली विकसित की। निकानोर पार्रा को पाब्लो नेरुदा के समानांतर चिली का महान कवि माना जाता है। नेरुदा की भावुक और विस्तृत शैली के विपरीत पार्रा की कविता कठोर, व्यंग्यात्मक और आधुनिक यथार्थवादी थी। उन्हें चिली का राष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार और स्पेन का प्रतिष्ठित मिगेल दि सर्वांतेस पुरस्कार दिया गया।


देवेश पथ सारिया द्वारा गोल चक्कर के लिए किए गए अन्य अनुवाद देखिए : देवेश पथ सारिया












2 Comments


Kumar Arun
15 hours ago

खूब, अद्भुत .. क्या ये अनुवाद पुस्तक के रूप में छप चुके हैं.

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Devesh
14 hours ago
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नहीं, अभी नहीं।

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