top of page


शुन्तारो तानीकावा की कविताएँ
अपनी आत्माओं की व्यर्थ खोज में
हम रह जाते हैं पीछे
बादाम मिश्रित टोफू के
मीठे व्यंजन के सामने बैठे हुए


अम्मी और अतिथि
मुझे ठीक से पता नहीं कि विधवा क्या होती है, लेकिन जब पड़ोसी मुझे "विधवा की बेटी" कहते हैं तब मुझे लगता है कि वह जरूर विधवा होंगी। दूसरे सभी बच्चों के पिता हैं, लेकिन मेरे कोई पिता नहीं हैं। शायद मेरे पिता न होने के साथ माँ के विधवा होने का कोई संबंध हो।


नींद
मूल कहानी : हारुकी मुराकामी अनुवाद : श्रीविलास सिंह बिना नींद के यह मेरा लगातार सत्रहवाँ दिन है। मैं अनिद्रा रोग के संबंध में बात नहीं कर रही हूँ। मैं जानती हूँ अनिद्रा रोग क्या होता है। मुझे इस तरह का कुछ काॅलेज के दिनों में हुआ था- ‘इस तरह का कुछ’ इसलिए क्योंकि मैं निश्चित नहीं हूँ कि तब जो हुआ था वह ठीक-ठीक वही था जिसे लोग अनिद्रा रोग कहते हैं। मैं सोचती हूँ कि एक डॉक्टर मुझे इस संबंध में बता सकता था। लेकिन मैं किसी डॉक्टर के पास नहीं गई। मैं जानती थी कि इससे कोई फायदा न


बसंत का हृदय
क्या तुम्हें प्रभु से डर लगता है जिसने तुम्हारे पिता के भी पिता के लिए युद्ध में ललकारने वाले हथियार बनाए या बौने लोग, जो समंदर से निकलकर रात में आते हैं और झींगुरों के साथ आत्मा की गहराइयों से निकालने वाला गीत गाते हैं?


काफ़्का को यहूदी पहचान से आगे पढ़ने की कोशिश
पीएत्रो चिताती की काफ़्का मेरे लिए एक जीवनी से कहीं अधिक है। यह किताब काफ़्का की यहूदी पहचान का निषेध नहीं करती, बल्कि उसे अपनी व्याख्या का केंद्र भी नहीं बनाती। वह काफ़्का को सबसे पहले एक रचनाकार की तरह पढ़ती है—ऐसे रचनाकार की तरह, जिसकी कल्पना अपने समय, अपने समाज और अपनी सांस्कृतिक सीमाओं का अतिक्रमण करके मनुष्य की सार्वभौमिक नियति को छूती है।


संसार का सबसे खूबसूरत डूबा हुआ आदमी
पहली बार वहां मौजूद आदमियों और औरतों ने अपनी गलियों के सूनेपन, अपने आंगन के सूखेपन, अपने ख्वाबों के ओछेपन को जाना—जब उन्होंने डूबे हुए आदमी की भव्यता और खूबसूरती का सामना किया।


रवि राहगीर की कविता
माड़ की छोरियाँ
प्यार करने की तगड़ी सजा पाती हैं
कूटी जाती हैं
पीटी जाती हैं
उन्हें डाँट पिलाई जाती है :
“छोरी तू तो हमारा नाम डुबाकर छोड़ेगी
खानदान को कतई पैंदे में ले जाएगी।”


शुन्तारो तानीकावा की कविता
जब वह नाश्ता बनाती तो वह नाश्ते पर कविता लिखता
जब वह जंगली बेर तोड़ती तो वह जंगली बेरों पर कविता लिखता
जब वह अपने वस्त्र उतारती तो वह उसके सौंदर्य पर कविता लिखता


इम्तियाज़ धारकर की कविताएँ
सभी हत्यारे ऐसे मुखौटे पहने हुए हैं
जिन पर भगवान का चेहरा बना है


हैडमास्टर हृदयराम
हैडमास्टर हृदय राम की दंडिका पूत-कुपूत की पहचान करवा देती है। जो काबिल होगा, वह टिक जाएगा और लंपट तो भाग ही जाएगा। उनकी दंडिका बिल्कुल हंस न्याय करती। दूध अलग और पानी अलग। उनकी दंडिका सूप की तरह कूड़ा करकट बाहर फेंकती और असल तत्व बचाकर रखती।




दुन्या मिखाइल की कविताएँ
लालटेनें रात की सच्ची मुरीद हैं
उनमें सितारों से ज़्यादा सब्र है
वे जलती रहती हैं सुबह तक।


सन्नाटे का भविष्य
एक जनजाति की भाषा में ‘मुझे तुम्हारी याद आती है’ अभिव्यक्ति के लिए एक अक्षर पर्याप्त है; जबकि दूसरी जनजाति की भाषा में इसके लिए दर्जनों वाक्य चाहिए। आर्कटिक क्षेत्र की एक जनजाति में तो मुँह से निकलने वाली भाप ही शब्दों का काम कर सकती है।


निकानोर पार्रा की कविताएँ
गुज़र चुका है भूतकाल
वह केवल स्मृति में है :
एक नोंचे हुए गुलाब से
एक और पंखुड़ी नहीं खींची जा सकती


नाज़िम हिकमत की कविताएँ
मेरा विश्वास करो
हम देखेंगे ख़ूबसूरत दिन
बच्चो, हम देखेंगे चमकीले दिन
हम ले जाएंगे अपनी स्पीडबोट्स खुले समुद्र में बच्चो
हम उन्हें ले जाएंगे चमकीले नीले समुद्र में...


चेस्लाव मिलोश की कविताएँ
नदियों के नाम रह जाते हैं तुम्हारे साथ।
कैसी अंतहीन लगती हैं वे नदियाँ!
तुम्हारे खेत हो जाते हैं बंजर
बदल जाता है शहर की मीनारों का रूप
तुम खड़े रह जाते हो किनारे, निःशब्द।


लोई अली ख़लील की कहानियां
मेरी माँ तो हर बिगड़ी चीज़ को संवारने वाली मसीहा है, वह मेरा घुटना भी मिनटों में जोड़ देगी।


मोमिना रज़ा की कविताएँ
हमारे बीच एक ज़बान पैदा हुई थी,
ख़ामोशी और तड़प से
मगर मैं इसे अकेली ही बोलती हूँ


क्रिस्टीना पेकोज की कविताएँ
सेब का दरख़्त
जिसे लगवाने में उसने मदद की थी
फलने को तैयार है फिर से


ध्यान सिंह की कविताएँ
मैं गुलशन नहीं हूँ।
यह तस्दीक़ तो
मेरा आलोचक ही कर सकता है।
आलोचक :
जो पतझड़ की प्रतीक्षा कर रहा है।
bottom of page
%20(3).png)