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शुन्तारो तानीकावा की कविताएँ
अपनी आत्माओं की व्यर्थ खोज में
हम रह जाते हैं पीछे
बादाम मिश्रित टोफू के
मीठे व्यंजन के सामने बैठे हुए


शुन्तारो तानीकावा की कविता
जब वह नाश्ता बनाती तो वह नाश्ते पर कविता लिखता
जब वह जंगली बेर तोड़ती तो वह जंगली बेरों पर कविता लिखता
जब वह अपने वस्त्र उतारती तो वह उसके सौंदर्य पर कविता लिखता


निकानोर पार्रा की कविताएँ
गुज़र चुका है भूतकाल
वह केवल स्मृति में है :
एक नोंचे हुए गुलाब से
एक और पंखुड़ी नहीं खींची जा सकती


रसूल हमज़ातोव की कविताएँ
बुकिंग क्लर्क, मैं हूँ तुम्हारा शुक्रगुज़ार
कि तुमने उसे सीट दी मेरी बग़ल में
जिससे हमने देखे दृश्य
डिब्बे की खिड़की जितने विस्तृत।


टी एस एलियट की कविताएँ
बीता हुआ समय और आने वाला समय
जो हो सकता था और जो होता रहा
एक ही सिरे की ओर इशारा करते हैं, जो सदा वर्तमान है।


महमूद दरवेश की कविताएँ
हम भी होते अंजीर के वृक्ष की पत्तियां, अथवा एक उपेक्षित मैदान के पौधे ताकि महसूस कर पाते मौसम का बदलना
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