top of page

चेस्लाव मिलोश की कविताएँ

  • 46 minutes ago
  • 6 min read


चेस्लाव मिलोश की कविताएँ 
अंग्रेज़ी से अनुवाद : श्रीविलास सिंह 

 

श्रद्धा


तुम, जिसे मैं बचा न सका 

सुनो मेरी बात 

समझने की कोशिश करो इस सरल आख्यान को, 

क्योंकि मुझे आएगी लज्जा इसे दोबारा कहते,

क़सम से, नहीं है मुझमें शब्दों की जादूगरी 

मैं बोलूंगा तुमसे एक बादल या वृक्ष की ख़ामोशी की भाँति।


मुझे मिली शक्ति क्यों कि तुम थे संहारक।

तुमने एक युग की विदा को मिला दिया 

एक नये युग के आरम्भ से, 

घृणा की संगीतमय सुंदरतायुक्त प्रेरणा,

पूर्णाकार प्राप्त अंधी शक्ति।


यहाँ है पोलिश नदी की छिछली घाटी और एक विशाल पुल 

गुज़रता सफ़ेद कोहरे से, यहाँ है एक ध्वस्त शहर; 

और तुम्हारी क़ब्र तक ले आती है हवा 

समुद्री पक्षियों की चीख 

तभी जब मैं तुमसे बात कर रहा हूँ। 


कविता क्या है, जो बचाती नहीं 

राष्ट्रों को या जनता को?

शासकीय झूठों से एक सहमति,

उन पियक्क्ड़ों का एक गीत 

जिनके गले कट जायेगें कुछ ही क्षणों में,  

दूसरे वर्ष की  छात्राओं के लिए पाठ, 

कि मैं चाहता था लिखना अच्छी कविता बिना उसे जाने, 

कि मुझे ज्ञात हुआ, बाद में, इसका शुभकर उद्देश्य   

इसमें और केवल इसी में मिलेगी मुझे मुक्ति।


वे छींटते हैं बाजरे या अफीम के बीज क़ब्रों पर

मृतात्माओं के खाने को, 

जो आती हैं पक्षियों का भेष धारण कर,   

मैं यह पुस्तक यहाँ रखता हूँ तुम्हारे लिए, 

जो कभी थे जीवित

ताकि तुम फिर न आओ कभी हमारे पास।  

(चेस्लाव मिलोश के अनुवाद से)



एक गीत : दुनिया  के अंत पर


जिस दिन होगा दुनिया  का अंत 

एक मधुमक्खी लगा रही होगी दूब का चक्कर,

एक मछुवारा कर रहा होगा मरम्मत अपने चमकीले जाल की,

खुशी से छलांग लगा रहे होंगे समुद्र में जल-जीव,

गौरैयों के बच्चे खेल रहे होंगे वर्षा की रिमझिम फुहारों में,

और होगी स्वर्णिम चमक सांप की त्वचा में, 

जैसे उसे होना चाहिए सदा ही।


जिस दिन होगा दुनिया  का अंत

छतरी लिए औरतें गुज़र रहीं होंगी खेतों के बीच से,

एक पियक्कड़ गिरा होगा लॉन के किनारे अर्द्धनिद्रित,

गली में आवाज़ लगा रहे होंगे सब्ज़ी बेचने वाले

और एक पीले पाल वाली नाव 

आती जा रही होगी टापू के और पास,

हवा में गूंज रहा होगा वायलिन का संगीत

जो ले के जाएगा तारों भरी रात में।


उन्हें होगी निराशा जिन्होंने की थी अपेक्षा आंधी और तड़ितपात की

और उन्हें भी, जिन्हें अपेक्षा थी अपशकुनों की और फ़रिश्तों के शंखनाद की,

उन्हें नहीं होगा विश्वास कि यह सब घटित हो रहा अभी ही,

जब तक कि चमक रहे होंगे सूरज-चाँद आसमान में 

जब तक मंडराते होंगे भँवरे गुलाबों पर 

जब तक जन्म ले रहे होंगे गुलाबी रंगत वाले बच्चे

किसी को नहीं होगा विश्वास कि यह घटित हो रहा अभी ही।


केवल एक सफ़ेद बालों वाला वृद्ध, जिसे होना चाहिए ईश्वर का दूत 

किंतु जो नहीं है, क्योंकि वह है बहुत व्यस्त

अपने टमाटरों की बेल को सहारा देता, दुहराता बार-बार 

नहीं होगा अन्य कोई दूसरा अंत दुनिया  का 

नहीं होगा अन्य कोई दूसरा अंत दुनिया  का।

(एंथोनी मिलोश के अनुवाद से)



लेखा बही


मेरी मूर्खताओं के इतिहास से भरे होंगे कई खंड ग्रंथों के


कुछ होंगे समर्पित अंतरात्मा के विरुद्ध कार्य करने को

उस पतिंगे की उड़ान से जो, जानते हुए भी,

गया होगा स्वभावतः फिर दिये की लौ की ओर ।


अन्य होंगे समर्पित चिंता से मुक्ति के रास्तों को,

वह छोटी सी अफ़वाह जो ख़तरे की चेतावनी होने के बावजूद, उपेक्षित रही।  


मैं अलग से निपटूंगा संतुष्टि और गर्व से,

उस समय जब मैं था उनके अनुयायियों में 

जो विजयी हो आये गर्वीली चाल से, ख़तरे से अंजान।


पर वह सब होता बस एक ही विषय, कामना,

यदि वह केवल मेरी अपनी होती—पर नहीं, बिलकुल नहीं; आह,

मैं चला था,  क्योंकि चाहता था मैं औरों जैसा होना, 

मैं था भयभीत उससे, जो था मेरे ही भीतर, क्रूर और अश्लील।


नहीं लिखा जाएगा मेरी मूर्खताओं का इतिहास।

इसलिए भी कि अब हो चुकी है देर, और सत्य भी है बहुत श्रमसाध्य।

(चेस्लाव मिलोश और रॉबर्ट पिंस्की के अनुवाद से)



मुठभेड़ 


भोर में जब हम गुज़र रहे थे 

गाड़ी में ठंड से जमे हुए खेतों के बीच से

अंधेरे में उभर आये थे लाल डैने


और एकाएक एक ख़रगोश भागा सड़क के आर-पार

हम में से एक ने उसकी ओर किया हाथ से इशारा 


यह है बहुत समय पहले की बात, आज उनमें से नहीं है जीवित कोई भी

न तो ख़रगोश, न ही वह आदमी जिसने किया था इशारा 


ओह मेरे प्रिय, कहाँ हैं वे, कहाँ जा रहे हैं वे—

हाथ की कौंध, क्षण भर की जुम्बिश, पत्थरों की सरसराहट।

मैंने पूछा दुःख से नहीं, बल्कि आश्चर्य से।

(चेस्लाव मिलोश और लिलियन वाली के अनुवाद से)



कविता की कला


मैंने सदा ही आकांक्षा की एक अधिक विस्तृत प्रारूप की

जो स्वतंत्र हो पद्य अथवा गद्य के दावों से

और जो समझने दे हमें एक-दूजे को, 

बिना दिए लेखक या पाठक को अवर्णनीय पीड़ाएं।


कविता के मूल तत्व में ही है कुछ अश्लील :

लाई जाती है सामने एक ऐसी बात, 

जो हम नहीं जानते कि हम में है भी,

इसलिए हम झपकाते हैं आँखें, 

मानो कूद कर आ गया हो  बाघ

और खड़ा हो प्रकाश में, अपनी पूँछ फटकारता।


इसीलिए कहा गया है सच ही, कविता के बारे में कि इसे लिखवाती है कोई दैवीय शक्ति

यद्यपि अतिशयोक्ति होगा यह मानना 

कि उसे होना चाहिए एक देव दूत। 

मुश्किल है यह अनुमान लगाना कि 

आता है कहाँ से कवियों में यह गर्व

जबकि अक्सर वे किये जाते रहते हैं लज्जित उनकी कमज़ोरियों के खुलासे से।


कौन संजीदा आदमी होना चाहेगा पिशाचों की एक बस्ती जैसा,

जो व्यवहार करते हैं ऐसा मानो वे हों सामान्य, 

बोलते हैं अनेक भाषाएं,

और जो, संतुष्ट हुए बिना उसके होंठो अथवा हाथों को चुरा कर,

लगे होते हैं बदलने में उसकी नियति, अपनी सुविधा हेतु।


यह सच है कि जो विकृत है, आज क़ीमत बहुत है उसकी,

और तुम सोच सकते हो कि मैं कर रहा हूँ बस मज़ाक़ 

अथवा मैंने खोज लिया है कोई और तरीक़ा 

कला की प्रशंसा का, विरोधाभास की मदद से।


था एक वक़्त जब पढ़ी जाती थी सिर्फ़ ज्ञान-पूर्ण पुस्तकें,

जो मदद करती थीं हमारी, सहने में पीड़ा और दुर्भाग्य।

पर सबके बाद अब यह नहीं है बिलकुल पहले जैसा 

जैसे कि हो पन्ने पलटना मनोचिकित्सालय से ताज़ा ताज़ा निकले हजारों ग्रंथों के।


और फिर भी दुनिया है भिन्न उससे, 

जैसी यह लगती है

और हम हैं उससे अलग 

जैसा हम अपने को देखते हैं अपनी उन्मत्तता में।

लोग इसीलिए बचाये रखते हैं 

ख़ामोश सत्य-निष्ठा को

और इसलिए पाते हैं सम्मान 

अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों से।


कविता का है उद्देश्य हमें याद दिलाना कि

कितना कठिन है बस एक व्यक्ति बने रहना, 

क्योंकि हमारा घर खुला है, 

और नहीं है दरवाज़ों में चाबियाँ,

और अनदेखे अतिथि आते-जाते रहते हैं इच्छानुसार।


मैं सहमत हूँ कि जो मैं कह रहा हूँ यहाँ, 

वह नहीं है कविता,

क्योंकि कविता लिखी जानी चाहिए 

यदा-कदा, अनिच्छा से,

असहनीय दबाव में और मात्र इस आशा से 

कि शुभ आत्माओं ने, न कि बुरी आत्माओं ने, 

हमें अपना उपकरण चुना है।

(चेस्लाव मिलोश और लिलियन वाली के अनुवाद से)



प्रेम


प्रेम का अर्थ है सीखना—‘स्वयं को देखना’

उस प्रकार जैसे कोई देखता है दूर की चीज़ों को

क्योंकि तुम केवल एक हो बहुत-सी चीज़ों में

और जो भी देखता है इस प्रकार, 

उपचार करता है अपने हृदय का,

तमाम व्याधियों से, बिना इसे जाने—

एक चिड़िया और एक वृक्ष ने कहा उसे : मित्र…


फिर वह चाहता है प्रयोग अपना और चीज़ों का

ताकि वे निखरें परिपक्वता की चमक में।

इसका नहीं है महत्व कि वह जो कर रहा है, उसे जानता है :

क्योंकि जो सबसे बेहतर करता है 

वह अक्सर नहीं समझता यह बात।

(रॉबर्ट हास के अनुवाद से)



भूल जाओ


भूल जाओ वे तकलीफ़ें

जो तुमने दी औरों को।

भूल जाओ वे कष्ट जो

औरों ने दिए तुम्हें।

पानी बहता है और बह जाता है,

धाराएं कौंधती हैं और खो जाती हैं,

तुम चलते हो धरती पर तुम भूल रहे हो।


कभी तुम सुनते होंगे दूर से आती आवाज़ तुम्हें मना करती

क्या है इसका अर्थ, पूछते हो तुम, गा रहा है कौन?

नन्हा सूरज बढ़ कर हो जाता है गर्म

जन्म होता जाता है पौत्र और प्रपौत्र का,

तुम निर्देशित किये जाते हो फिर उसी हाथ से।


नदियों के नाम रह जाते हैं तुम्हारे साथ।

कैसी अंतहीन लगती हैं वे नदियाँ!

तुम्हारे खेत हो जाते हैं बंजर

बदल जाता है शहर की मीनारों का रूप

तुम खड़े रह जाते हो किनारे, निःशब्द।

(रॉबर्ट हास के अनुवाद से)


गोल चक्कर वेब पत्रिका अत्यंत सीमित संसाधनों से चल रही है। इस वेबसाइट के संचालन में आर्थिक सहयोग देने हेतु दिए गए क्यू आर कोड का उपयोग करें :


30 जून, 1911 को लिथुआनिया में जन्मे चेस्लाव मिलोश का अधिकांश बचपन ज़ार के रूस में बीता जहाँ उनके पिता काम करते थे। महायुद्ध के बाद के दिनों में वे पोलैंड की सरकार के सांस्कृतिक प्रतिनिधि भी रहे। बाद में पोलैंड में कम्युनिस्ट शासन के राजनैतिक दमन के कारण उन्होंने 1960 में अपना देश छोड़ दिया और पहले फ्रांस में और फिर अपनी मृत्युपर्यंत संयुक्त राज्य अमेरिका में रहे। वे न केवल पोलिश कविता के वरन समकालीन विश्व कविता के सबसे प्रतिष्ठित कवियों में से एक हैं। उनकी कविताओं में अतीत का त्रासद और विद्रूपतापूर्ण वर्णन मिलता है। उनकी कविताओं, निबंधों, उपन्यासों और अन्य रचनाओं का, जो मूल रूप से पोलिश भाषा मे लिखी गयी थीं, विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उनकी रचनाधर्मिता का सम्मान करते हुए चेस्लाव मिलोश को वर्ष 1980 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया।


श्रीविलास सिंह वरिष्ठ कवि, गद्यकार एवं अनुवादक हैं। गोल चक्कर पर इनका पूर्व प्रकाशित काम देखिए : पतंगबाज़ (अफ़ग़ान कहानी), बिल्लियों का क़स्बा, वृद्ध स्त्री की त्चचामहमूद दरवेश की कविताएँ, केन का मेमना , रसूल हमज़ातोव की कविताएँ






Comments


bottom of page