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गिओकोंडा बेली की कविताएँ
अगर तुम मजबूत औरत हो
युद्ध की तैयारी करो:
सीखो अकेले रहना
बिना किसी डर घुप्प अंधेरे में सोना
गरजते तूफान में किसी से रस्सी फेंकने की अपेक्षा मत करो
धारा के विरुद्ध तैरना सीखो


सायत नोवा की कविताएँ
एक तिल ने समंदर को शांत किया संवार
एक ने गिरा दी सृष्टि की मीनार
और एक ने ठप्प किया चांदी का बाज़ार
और फिर एक ने ख़ाली की खदान


हॉली मैक्निश की कविता
शहरों के अस्पताल में पटापट मर रहे हैं बच्चे
उलटी-दस्त से पलक झपकते
माँओं का दूध पलट सकता है पल भर में यह चलन
इसलिए अब नहीं बैठूँगी सर्द टॉयलेट की सीटों पर


मौमिता आलम की कविताएँ
उन्होंने किराने का सामान जमा नहीं किया है
उनके पास कल नहीं है
उनके पास आज ही है
वे इक्कीस दिन तक नहीं जीते


इलेन काह्न की कविताएँ
कला के कठोर शब्द
छुअन की असंभव कारीगरी
यह, यह है तुम्हारा गाल
यहाॅं, यहाॅं है तुम्हारी गर्दन।




युद्ध पर कुछ प्रासंगिक कविताएँ
प्रेसीडेंट से और साथ में मुझसे ज्यादा दुखी
और कोई कैसे हो सकता है भला?




महमूद दरवेश की कविताएँ
हम भी होते अंजीर के वृक्ष की पत्तियां, अथवा एक उपेक्षित मैदान के पौधे ताकि महसूस कर पाते मौसम का बदलना


मोहन सिंह की कविताएँ
बर्फ़ गिर रही है...
पर इस बार इसके फाहे
रुई की तरह,
स्त्री के ओठों की तरह
नर्म, निग्घे और कोमल नहीं हैं




अनिल चावड़ा की कविताएँ
जिनके पेट में दावानल जला है
ऐसे भूखे लोगों का
स्वाद से भला क्या लेना-देना?


मेरी ओलिवर की कविताएँ
चीज़ें, चीज़ें, कितनी चीज़ें... आग लगा दो इन सब में। जल जाएँ सारी चीज़ें। इन सबको मिला कर जो आग बनेगी, वह कितनी ख़ूबसूरत होगी।


फ़ोरुग फ़रुख़ज़ाद की कविता
जीवन शायद रति के दो क्षणों के मध्य के
मादक विश्राम में सिगरेट का सुलगाना है


लखमीचंद की रागिनियां
पीस पकाकर खिलाना, दिन भर ईख निराना
साँझ पड़े घर आना, गया सूख बदन का खून
निगोड़े ईख तूने खूब सताई रे


जीन-बैप्टिस्ट ताती-लुटार्ड की कविताएँ
आदम के बेटों के सिर पर जंग आ चुका है
और मैं कफ़न ओढ़कर सोऊंगा






फिलिस्तीनी बच्चे : कुछ कविताएँ
हम यहाँ रहते हैं, अपने ही मुल्क के अंदर लेकिन मुल्क से निष्कासित


नाओमी शिहाब नाए की कविताएँ
ख़ुशी पड़ोस वाले घर की छत पर गाती हुई उतरती है
और जब चाहे अदृश्य हो जाती है।
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