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ललन चतुर्वेदी की कविताएँ
कितनी वस्तुएं मिलकर भरतीं हैं एक मूर्ति में सौन्दर्य
यह हमारी दृष्टि की सीमाएं हैं कि हम देख नहीं पाते संपूर्ण




चंद्रेश्वर की कविताएँ
जब करती हो इंतज़ार मेरा
तो उसमें शामिल ख़ालीपन
बनाता है मुझे सफ़र में
कुछ असहज


राग पूरबी : शिरीष कुमार मौर्य की कविताएँ
जिन्होंने
हमें उजाले बख़्शे
वे हनेरों के
ब्योपारी निकले




शिवांगी गोयल की कविताएँ
बेटियाँ अंतिम संस्कार के दिन आ पाती हैं
अपने ससुराल से लौटकर
बस अंतिम प्रणाम कर पाती हैं
और माँ के साथ बैठकर रो पाती हैं।
















चंद्रमोहन की कविताएँ
मैंने मालिकों द्वारा डस्टबिन में फेंकी हुई
कलमों को उठाकर
चिथड़े पन्नों पर
जस का तस छाप दिया
जैसा मैंने जीवन जीया।




नेहा नरूका की कविताएँ
आज़ादी बड़ी मुश्किल शै है इतनी मुश्किल कि जीवन का रस भोगते हुए वह कभी नहीं मिल सकती उसके लिए लड़ना पड़ता है








जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताएँ
जीवन का गणित बिल्कुल भिन्न है अंकगणित से
यहाँ चाहे जितना कर लीजिए कोशिश
दो दूनी चार नहीं हो पाता है
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