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राग पूरबी : शिरीष कुमार मौर्य की कविताएँ
जिन्होंने
हमें उजाले बख़्शे
वे हनेरों के
ब्योपारी निकले




शिवांगी गोयल की कविताएँ
बेटियाँ अंतिम संस्कार के दिन आ पाती हैं
अपने ससुराल से लौटकर
बस अंतिम प्रणाम कर पाती हैं
और माँ के साथ बैठकर रो पाती हैं।












रति सक्सेना की कविताएँ
माँ कहती थीं कि चीटियां सधवा होती हैं
मुझे मालूम नहीं माँ के विश्वास का आधार क्या था
क्या उन्होनें कभी चींटी के हाथों में
चूड़ियां देखीं






चंद्रमोहन की कविताएँ
मैंने मालिकों द्वारा डस्टबिन में फेंकी हुई
कलमों को उठाकर
चिथड़े पन्नों पर
जस का तस छाप दिया
जैसा मैंने जीवन जीया।




नेहा नरूका की कविताएँ
आज़ादी बड़ी मुश्किल शै है इतनी मुश्किल कि जीवन का रस भोगते हुए वह कभी नहीं मिल सकती उसके लिए लड़ना पड़ता है








जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताएँ
जीवन का गणित बिल्कुल भिन्न है अंकगणित से
यहाँ चाहे जितना कर लीजिए कोशिश
दो दूनी चार नहीं हो पाता है


मदन कश्यप की कविताएँ
मुर्दाघर में हर रात चुपके से आ जाएगी चाँदनी
मेरे घावों को सहलाएगी
कई दिनों तक कई कोणों से मुझे काटा जाएगा
हर कटाई के बाद मेरे भीतर से न
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