top of page


मुझे एक और चाबी चाहिए
कवि और चोर के बीच की दूरी बहुत कम होती है। दोनों ही अदृश्य होकर दूसरों के जीवन के सबसे निजी हिस्सों में प्रवेश करते हैं। फ़र्क बस इतना है कि चोर भौतिक चीजों को ले जाता है, और कवि उन अमूर्त सत्यों को चुराता है, जिन्हें लोग खो चुके होते हैं अथवा खो देने का अभिनय करते हैं।


जेन-ज़ी का तोता
एक पोस्ट की सुबह से शाम तक की उम्र का एक मामूली-सा लेखक अपने फालोवर्स के साथ आपको गाली बकता और अपने पोस्ट की उम्र को दो-चार दिनों के लिए बढ़ाता बेदाग निकल सकता है। क्योंकि उसकी इस हरकत से उसके उस पोस्ट की वह सुबह से शाम की सीमित उम्र कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ जाएगी।


टर्निंग पॉइंट क्या है पार्टनर!
सारा खेल राजा का है... उसकी सलामती का है। प्यादा तो बर्बादी के लिए, ज़िबह के लिए बना है।


नटनी का बारा
हम आँसुओं में पिघल जाएँ तो नाच और करतब दिखाना कैसे संभव हो? एक जगह से दूसरी जगह जाना कैसे संभव हो? बेवकूफ लड़का! हम में ठहराव खोजता है।


विगत की व्याधि
आहिस्ता-आहिस्ता कमर से चढ़ती हुई गर्दन के करीब आते-आते ठीक उन दिनों के जैसे उनकी देह गंध ने पीछे से उसे अपनी आगोश में भर लिया। मसालों में लिपटी हुई तेल-घी की मिश्रित गंध हमेशा की तरह उसकी दाईं ओर से तीक्ष्ण हो गई।


दहकते इश्तिहार
उसे पता था कि ये इश्तिहार उसके लिए नहीं हैं। न तो उसका मतदाता पहचान पत्र है और न ही जेब में रुपये।


बाकुम-बाकुम
अपने ब्याह के लिए सूजनी और तकिया खोल, यही दो चीज बनाई। तकिया खोल पर फूल और नाम काढ़े। अपनी बनाई हुई चीजें बहुत सुकून देती हैं। रानी को अहसास हुआ। तकिया पर काढ़े गए फूलों से पहली बार खुशबू आ रही थी। उसने पलट कर नाक से फूलों को छुआ। सच में उसे गुलाब की गंध निकल रही थी। ये कैसे। वो हैरान।


इस दुनिया को बचाने के लिए
हर घर शुरू में बच्चों वाला घर होता है, फिर धीरे-धीरे बिना बच्चों वाले घर में बदल जाता है। बच्चे बड़े होकर एक नए घर की तलाश में बाहर निकल जाते हैं जहाँ वे अपने खोए हुए बचपन को इत्मीनान से याद कर अपने भीतर जन्मे दु:ख को महसूस कर सकें। यह जीवन की एक नियति है। जीवन का एक निर्धारित क्रम।


कॉटन कैंडी
अब बाँस को साधना वह अच्छी तरह से सीख गया था। माँ कहती कि बाँस को साधना सरल है पर ज़िंदगी को साधने का हुनर बड़ा कठिन है। हालाँकि यह बात उसके समझ में कभी नहीं आई।


गायब होती दुनिया
सुबह का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा दोपहर का रहता है। दोपहर का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा शाम का रहता है। शाम का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा रात का रहता है...! आसमान समुद्र-सा ही होता है, उसमें बादलों की लहर रहती है। चंद्रमा, सूरज, तारे आसमान के जीव-जंतु हैं!
bottom of page
%20(3).png)



