आस्था शर्मा की कविताएँ

अनकहा
उन बातों का क्या
जो करनी थीं अनजान शहरों में
अब वो बातें कहाँ होंगी
हर वो शहर
जहाँ से भी गुज़रूँगी
तुम्हारे नाम एक कविता
एक चिट्ठी
मैं लिखकर छोड़ जाऊँगी
फिर घूमती रहेंगी
बिना पते की चिट्ठियाँ
विश्व भर में
कविताएँबनकर।
सहारा
तकलीफ़ जैसे
एक नाव थी, जिसमें बैठकर
तुम्हारे पास आई थी।
नाव लौट गई,
किनारा
रुका रहा
एक तरफ़ घना जंगल,
दूसरी तरफ़ पानी ही पानी।
डूबना और भटकना
दो ही रास्ते थे।
पाँव जंगल की ओर मुड़े,
तो पानी ने पुकारा।
मुझे तैरना नहीं आता
ये किसे बताऊँ?
इस उलझन में वहीं खड़ी रही
वर्षों।
फिर एक तूफ़ान आया,
और एक-एक कर सब ख़त्म होते गए।
बचा एक पेड़
और मैं।
उसकी सबसे ऊँची टहनी पर
जाकर बैठ गई।
उम्मीद
आँखें खुलीं तो देखा
रात का तूफ़ान अब थम गया है
मैं बीच समंदर में हूँ,
यहाँ से अब किनारा नहीं दिखता
दिखता है सिर्फ़ विस्तृत नभऔर अनंत।
दूर कहीं एक जहाज़
अपनी गति से जाता हुआ,
एक लकीर बना रहा है
पानी में उम्मीद की रोशनी-सा
एक रास्ता।
संवाद
(1)
मन ने पूछा तन से
जैसे स्वप्न ने पूछा है कविता से
और यथार्थ ने पूछा है जीवन से कई बार
कि संवाद कितना गहरा हो सकता है
आत्मा की ख़ुराक़ कौन तय करता है,
किसे पता है कि कब कौन सी बात
से खुलेंगे दशकों से बंद दरवाज़े
उम्र में क़ैद, वर्षों में जकड़ा
ढूँढ रहा मन उस क्षण का पता
किसी ने बताया था,
होते हैं दशक
एक क्षण में रिहा
(2)
एक क्षण की कुंजी
खोई है एक संवाद में
मन ने इस उम्मीद में
कई गोते लगाये हैं!
(3)
मन तलाश रहा एक घाट
शहर तुम तय कर लेना
बनारस, पेरिस, वियना या प्राग
मुझे चाहिए एक टिमटिमाती रात
जिसमे दशक सिमट आए
क्षणों में
उम्र पिघल आए
बातों में
और दृश्य उतर आएँ
कैनवास पर
अपने रंगों में डूबे
गहरे
सघन
अर्थपूर्ण!
(4)
मैंने तुम तक आने में दशकों की यात्रा तय की है
क्या तुमने मुझे बुलाया था?
क्या मैं तुम तक पहुँचने निकली थी
या हम यूँ ही मिले अनायास
अपनी दिशाओं में बढ़ते
जैसे मिलते हैं पात्र कवि को
और मिलती है कविता
एक भूली भटकी कहानी से
कौन किसे लिखे
साक्षी हैं
दशक, क्षण, नदियाँ, इतिहास
सुनाओ तुमने क्या लिखा है?
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आस्था शर्मा एक युवा कवि हैं। उनकी रचनाएँ इंडियन लिटरेचर, नया ज्ञानोदय और बया जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। मूलतः पटना की रहने वाली आस्था ने कथक नृत्य का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है।
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