top of page


शुन्तारो तानीकावा की कविताएँ
अपनी आत्माओं की व्यर्थ खोज में
हम रह जाते हैं पीछे
बादाम मिश्रित टोफू के
मीठे व्यंजन के सामने बैठे हुए


नींद
मूल कहानी : हारुकी मुराकामी अनुवाद : श्रीविलास सिंह बिना नींद के यह मेरा लगातार सत्रहवाँ दिन है। मैं अनिद्रा रोग के संबंध में बात नहीं कर रही हूँ। मैं जानती हूँ अनिद्रा रोग क्या होता है। मुझे इस तरह का कुछ काॅलेज के दिनों में हुआ था- ‘इस तरह का कुछ’ इसलिए क्योंकि मैं निश्चित नहीं हूँ कि तब जो हुआ था वह ठीक-ठीक वही था जिसे लोग अनिद्रा रोग कहते हैं। मैं सोचती हूँ कि एक डॉक्टर मुझे इस संबंध में बता सकता था। लेकिन मैं किसी डॉक्टर के पास नहीं गई। मैं जानती थी कि इससे कोई फायदा न


नाज़िम हिकमत की कविताएँ
मेरा विश्वास करो
हम देखेंगे ख़ूबसूरत दिन
बच्चो, हम देखेंगे चमकीले दिन
हम ले जाएंगे अपनी स्पीडबोट्स खुले समुद्र में बच्चो
हम उन्हें ले जाएंगे चमकीले नीले समुद्र में...


चेस्लाव मिलोश की कविताएँ
नदियों के नाम रह जाते हैं तुम्हारे साथ।
कैसी अंतहीन लगती हैं वे नदियाँ!
तुम्हारे खेत हो जाते हैं बंजर
बदल जाता है शहर की मीनारों का रूप
तुम खड़े रह जाते हो किनारे, निःशब्द।


रसूल हमज़ातोव की कविताएँ
बुकिंग क्लर्क, मैं हूँ तुम्हारा शुक्रगुज़ार
कि तुमने उसे सीट दी मेरी बग़ल में
जिससे हमने देखे दृश्य
डिब्बे की खिड़की जितने विस्तृत।


पतंगबाज़
मैं जानता था कि जब डोर एक जैसी गुणवत्ता की हो तो अनुभव ही निर्णायक भूमिका निभाता है।


बिल्लियों का क़स्बा
कौवों का एक झुंड कांव-कांव करता हुआ आकाश के पार चला गया। टेंगो खड़ा हुआ, अपने पिता के पास गया और उनके कंधे पर अपना हाथ रख दिया। "विदा, पिता जी, मैं जल्दी ही फिर आऊंगा।"


वृद्ध स्त्री की त्चचा
मुस्कराहट से उसका तात्पर्य, आतंरिक से था अथवा बाह्य से? मैंने आसानी से इसे आतंरिक समझा और अवकाश के अगले दिनों में उससे ‘स्वयं’ के रूप में मिलने का निर्णय लिया।


महमूद दरवेश की कविताएँ
हम भी होते अंजीर के वृक्ष की पत्तियां, अथवा एक उपेक्षित मैदान के पौधे ताकि महसूस कर पाते मौसम का बदलना


केन का मेमना
धारा उसे दक्षिण की ओर बहा ले गई और स्वतंत्र होने की खुशी में वह चोट पहुँचाती लहरों और ठंडी हवा को भूल गया।
bottom of page
%20(3).png)