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आशुतोष प्रसिद्ध की डायरी
दिनों बाद सुकून की कोई लय लगातार सुनता रहा। एक हँसी, एक छेड़ लगातार गूँजती रही। फिसलते रास्ते पर हम सम्भलकर चलते रहे और अन्ततः सही राह पा गए।


रुत बरसन की आई (बारिशें और रेगिस्तान)
जब बरसने लगता है गरज-गरज कर तो बुढ़िया माई के चेहरे पर उतर आती है दंतविहीन मुस्कान। वह चारपाई पर बैठे-बैठे उसी मुस्कान संग देखती रहती है बच्चों के पानी के साथ छपाक-छप के करतब।


गैब्रियल मात्ज़नेफ़ : साहित्य का अपराध और वनेसा स्प्रिंगोरा का प्रतिरोध
प्रश्न यह है कि जब कोई लेखक खुले तौर पर बच्चों के साथ यौन संबंधों को महिमा के साथ प्रस्तुत करता है — और जब समाज उसे पुरस्कार, पेंशन और मंच देता है — तो क्या वह केवल लेखक रह जाता है? या फिर वह एक अपराधी बनकर भी समाज के विवेक की परीक्षा लेता है?


वृद्ध स्त्री की त्चचा (जापानी कहानी)
मुस्कराहट से उसका तात्पर्य, आतंरिक से था अथवा बाह्य से? मैंने आसानी से इसे आतंरिक समझा और अवकाश के अगले दिनों में उससे ‘स्वयं’ के रूप में मिलने का निर्णय लिया।


काश ऐसे ही फूल हमारी ज़िंदगियों में भी खिल पाएं
बड़ा फूल कह रहा है, बच्चा फूल सुन रहा है : “कल मैं मुरझाकर मर जाऊंगा तब तुम महकाना इस बगिया को!”


हिन्दी साहित्य में विकलांग विमर्श
समाज में और स्वयं में विमर्श की भाषा का विकास करना होगा तभी हम सही मायने में विकलांग-विमर्श में सक्षम हो पाएंगे।


अलारिज, स्पेन का एक चमत्कारिक नगर
यूरोपीय देश अपनी स्मृतियों को मिटाते नहीं, उन्हें भीतर से नया रूप देकर भी पुरातन कला को जीवित रखने की कोशिश करते हैं।


देवभूमि बनाम भूतभूमि
वक़्त बीतने के साथ उत्तराखंड के गाँवों से लोग पलायन करने लगे। गाँव ख़ाली होते गए और अब गाँवों में देवता ज़्यादा और लोग कम रह गए हैं।


शब्द शरीर
जीवन भर मृत्यु चाहने वालों के पास जब मृत्यु पहुँचती है तो वो भागते फिरते हैं। भागने वालों के लिए कोई भी दुनिया सुकून भरी नहीं हो सकती।
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