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बाकुम-बाकुम
अपने ब्याह के लिए सूजनी और तकिया खोल, यही दो चीज बनाई। तकिया खोल पर फूल और नाम काढ़े। अपनी बनाई हुई चीजें बहुत सुकून देती हैं। रानी को अहसास हुआ। तकिया पर काढ़े गए फूलों से पहली बार खुशबू आ रही थी। उसने पलट कर नाक से फूलों को छुआ। सच में उसे गुलाब की गंध निकल रही थी। ये कैसे। वो हैरान।


हैडमास्टर हृदयराम
हैडमास्टर हृदय राम की दंडिका पूत-कुपूत की पहचान करवा देती है। जो काबिल होगा, वह टिक जाएगा और लंपट तो भाग ही जाएगा। उनकी दंडिका बिल्कुल हंस न्याय करती। दूध अलग और पानी अलग। उनकी दंडिका सूप की तरह कूड़ा करकट बाहर फेंकती और असल तत्व बचाकर रखती।


अपने-अपने नामवर (सात प्रसंग)
उनकी धोती पीली-सी थी। मैंने सोचा - “क्या नामवर जी नील का प्रयोग नहीं करते। फिर मुझे वे पिता की तरह लगे, मन में सोचा कि कहूं कि लाइए आपके पांव दबा दूँ।”


इस दुनिया को बचाने के लिए
हर घर शुरू में बच्चों वाला घर होता है, फिर धीरे-धीरे बिना बच्चों वाले घर में बदल जाता है। बच्चे बड़े होकर एक नए घर की तलाश में बाहर निकल जाते हैं जहाँ वे अपने खोए हुए बचपन को इत्मीनान से याद कर अपने भीतर जन्मे दु:ख को महसूस कर सकें। यह जीवन की एक नियति है। जीवन का एक निर्धारित क्रम।


कॉटन कैंडी
अब बाँस को साधना वह अच्छी तरह से सीख गया था। माँ कहती कि बाँस को साधना सरल है पर ज़िंदगी को साधने का हुनर बड़ा कठिन है। हालाँकि यह बात उसके समझ में कभी नहीं आई।


गायब होती दुनिया
सुबह का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा दोपहर का रहता है। दोपहर का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा शाम का रहता है। शाम का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा रात का रहता है...! आसमान समुद्र-सा ही होता है, उसमें बादलों की लहर रहती है। चंद्रमा, सूरज, तारे आसमान के जीव-जंतु हैं!
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