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पाताल की दुखती रगें
पाताल की दुखती रगें कहानी : तौसीफ़ बरेलवी उसे कई रोज़ से अपने हम नफ़्सों के ख़ून की बू आ रही थी लेकिन वह उस बू के पीछे जा भी नहीं सकता था। हाँ उसके अंदर से एक हौल ज़रूर उठ रही थी कि कुछ बहुत भयानक होने वाला है। पूरा जंगल रोज़ जिन परिंदों कि चहचहाहटों से अपनी सुबह करता था, अब वे आवाज़ें ख़ामोश होने वाली थीं। आख़िर ऐसा भी क्या हो गया था...? वह उस पसरती हुई ख़ामोशी का पता लगाना चाहता था लेकिन उससे कुछ करते नहीं बन रहा था। आख़िर वह कर भी क्या सकता था? अपनों के ख़ून की बू के साथ ही दिल को थर्


नटनी का बारा
हम आँसुओं में पिघल जाएँ तो नाच और करतब दिखाना कैसे संभव हो? एक जगह से दूसरी जगह जाना कैसे संभव हो? बेवकूफ लड़का! हम में ठहराव खोजता है।


अम्मी और अतिथि
मुझे ठीक से पता नहीं कि विधवा क्या होती है, लेकिन जब पड़ोसी मुझे "विधवा की बेटी" कहते हैं तब मुझे लगता है कि वह जरूर विधवा होंगी। दूसरे सभी बच्चों के पिता हैं, लेकिन मेरे कोई पिता नहीं हैं। शायद मेरे पिता न होने के साथ माँ के विधवा होने का कोई संबंध हो।


नींद
मूल कहानी : हारुकी मुराकामी अनुवाद : श्रीविलास सिंह बिना नींद के यह मेरा लगातार सत्रहवाँ दिन है। मैं अनिद्रा रोग के संबंध में बात नहीं कर रही हूँ। मैं जानती हूँ अनिद्रा रोग क्या होता है। मुझे इस तरह का कुछ काॅलेज के दिनों में हुआ था- ‘इस तरह का कुछ’ इसलिए क्योंकि मैं निश्चित नहीं हूँ कि तब जो हुआ था वह ठीक-ठीक वही था जिसे लोग अनिद्रा रोग कहते हैं। मैं सोचती हूँ कि एक डॉक्टर मुझे इस संबंध में बता सकता था। लेकिन मैं किसी डॉक्टर के पास नहीं गई। मैं जानती थी कि इससे कोई फायदा न


बसंत का हृदय
क्या तुम्हें प्रभु से डर लगता है जिसने तुम्हारे पिता के भी पिता के लिए युद्ध में ललकारने वाले हथियार बनाए या बौने लोग, जो समंदर से निकलकर रात में आते हैं और झींगुरों के साथ आत्मा की गहराइयों से निकालने वाला गीत गाते हैं?


संसार का सबसे खूबसूरत डूबा हुआ आदमी
पहली बार वहां मौजूद आदमियों और औरतों ने अपनी गलियों के सूनेपन, अपने आंगन के सूखेपन, अपने ख्वाबों के ओछेपन को जाना—जब उन्होंने डूबे हुए आदमी की भव्यता और खूबसूरती का सामना किया।


विगत की व्याधि
आहिस्ता-आहिस्ता कमर से चढ़ती हुई गर्दन के करीब आते-आते ठीक उन दिनों के जैसे उनकी देह गंध ने पीछे से उसे अपनी आगोश में भर लिया। मसालों में लिपटी हुई तेल-घी की मिश्रित गंध हमेशा की तरह उसकी दाईं ओर से तीक्ष्ण हो गई।


दहकते इश्तिहार
उसे पता था कि ये इश्तिहार उसके लिए नहीं हैं। न तो उसका मतदाता पहचान पत्र है और न ही जेब में रुपये।


बाकुम-बाकुम
अपने ब्याह के लिए सूजनी और तकिया खोल, यही दो चीज बनाई। तकिया खोल पर फूल और नाम काढ़े। अपनी बनाई हुई चीजें बहुत सुकून देती हैं। रानी को अहसास हुआ। तकिया पर काढ़े गए फूलों से पहली बार खुशबू आ रही थी। उसने पलट कर नाक से फूलों को छुआ। सच में उसे गुलाब की गंध निकल रही थी। ये कैसे। वो हैरान।


हैडमास्टर हृदयराम
हैडमास्टर हृदय राम की दंडिका पूत-कुपूत की पहचान करवा देती है। जो काबिल होगा, वह टिक जाएगा और लंपट तो भाग ही जाएगा। उनकी दंडिका बिल्कुल हंस न्याय करती। दूध अलग और पानी अलग। उनकी दंडिका सूप की तरह कूड़ा करकट बाहर फेंकती और असल तत्व बचाकर रखती।


इस दुनिया को बचाने के लिए
हर घर शुरू में बच्चों वाला घर होता है, फिर धीरे-धीरे बिना बच्चों वाले घर में बदल जाता है। बच्चे बड़े होकर एक नए घर की तलाश में बाहर निकल जाते हैं जहाँ वे अपने खोए हुए बचपन को इत्मीनान से याद कर अपने भीतर जन्मे दु:ख को महसूस कर सकें। यह जीवन की एक नियति है। जीवन का एक निर्धारित क्रम।


कॉटन कैंडी
अब बाँस को साधना वह अच्छी तरह से सीख गया था। माँ कहती कि बाँस को साधना सरल है पर ज़िंदगी को साधने का हुनर बड़ा कठिन है। हालाँकि यह बात उसके समझ में कभी नहीं आई।


सन्नाटे का भविष्य
एक जनजाति की भाषा में ‘मुझे तुम्हारी याद आती है’ अभिव्यक्ति के लिए एक अक्षर पर्याप्त है; जबकि दूसरी जनजाति की भाषा में इसके लिए दर्जनों वाक्य चाहिए। आर्कटिक क्षेत्र की एक जनजाति में तो मुँह से निकलने वाली भाप ही शब्दों का काम कर सकती है।


गायब होती दुनिया
सुबह का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा दोपहर का रहता है। दोपहर का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा शाम का रहता है। शाम का आसमान वैसा कभी नहीं रहता है, जैसा रात का रहता है...! आसमान समुद्र-सा ही होता है, उसमें बादलों की लहर रहती है। चंद्रमा, सूरज, तारे आसमान के जीव-जंतु हैं!


रोजर डीन किसेर की कहानियाँ
हर साल जब तितलियाँ अनाथालय की ओर लौटतीं, तो मैं कोशिश करता कि वे मेरे सिर पर आकर बैठ जाएँ और मैं उनको बहुत दूर उड़ा दूँ, क्योंकि उन्हें नहीं मालूम था कि जीने और मरने के लिहाज़ से अनाथालय कितनी बुरी जगह होती है...।


प्रेम और युद्ध
युद्ध को माफ कर दो। हर उस चीज़ को माफ़ कर दो जो हमारी यादों को नष्ट करती है। या हमें याद न रखने की वजह बनती है। या हमें पीड़ा पहुँचाती है।


दो फिलिस्तीनी कहानियां
उसे जब कुछ नहीं समझ आया तो उसने बोतल का ढक्कन हटाया और अंदाज़ से उस जमीन पर पूरा दूध उड़ेल दिया जहाँ वह अपने बच्चे को छोड़कर गई थी


अंधों का देश
एक अजीब चीज़ है, जो आंख कहलाती है। यह चेहरे पर एक महीन अवसाद रचने के लिए बनी होती है
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