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इम्तियाज़ धारकर की कविताएँ
सभी हत्यारे ऐसे मुखौटे पहने हुए हैं
जिन पर भगवान का चेहरा बना है


मलाइका राय की कविताएँ
होती है मोहब्बत में हार,
बे-आबरू, कूचे से
निकलना पड़ता है।
खिलाना भी,
खाना पड़ता है अपना गोश्त,
इश्क़ निगलना पड़ता है।


मोमिना रज़ा की कविताएँ
हमारे बीच एक ज़बान पैदा हुई थी,
ख़ामोशी और तड़प से
मगर मैं इसे अकेली ही बोलती हूँ


चूहेदानी, उर्दू कहानी
दूसरों के बिल खोदकर अपने घर बसाएंगे तो और क्या होगा। ये तबाही हमने अपने हाथों ही तो बुलाई है।
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