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शिवांगी गोयल की कविताएँ
बेटियाँ अंतिम संस्कार के दिन आ पाती हैं
अपने ससुराल से लौटकर
बस अंतिम प्रणाम कर पाती हैं
और माँ के साथ बैठकर रो पाती हैं।








चंद्रमोहन की कविताएँ
मैंने मालिकों द्वारा डस्टबिन में फेंकी हुई
कलमों को उठाकर
चिथड़े पन्नों पर
जस का तस छाप दिया
जैसा मैंने जीवन जीया।


नेहा नरूका की कविताएँ
आज़ादी बड़ी मुश्किल शै है इतनी मुश्किल कि जीवन का रस भोगते हुए वह कभी नहीं मिल सकती उसके लिए लड़ना पड़ता है




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