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साँड
गाँव के मज़बूत और फ़ुर्तीले नौजवान हर तरह से तैयार होकर साँड की प्रतीक्षा करने लगे। जल्द ही मौक़ा हाथ आ गया। साँड के गाँव में घुसते ही नौजवानों की टोली अपने हाथों में लाठी और रस्सी लेकर उसके पीछे दौड़ पड़ी।


मलाइका राय की कविताएँ
होती है मोहब्बत में हार,
बे-आबरू, कूचे से
निकलना पड़ता है।
खिलाना भी,
खाना पड़ता है अपना गोश्त,
इश्क़ निगलना पड़ता है।


चूहेदानी
दूसरों के बिल खोदकर अपने घर बसाएंगे तो और क्या होगा। ये तबाही हमने अपने हाथों ही तो बुलाई है।
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