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ताकि स्मृति बची रहे (मंगलेश डबराल की कविता)
जो भी दिल्ली पहुँचता है, यह महानगर उसे बदल लेता है। कभी-कभी तो इस परिवर्तन का पता तक हमें नहीं लग पाता है। दिल्ली के जादू से विरले ही बच पाते हैं। मंगलेश इसके अपवाद नहीं थे।


विधान गुंजन की कविताएँ
कुम्हार का घर चलाने में
उन पत्थरों का भी योगदान रहा,
जिनकी वजह से
अक्सर फूट जाया करते थे
मटके


हर्षवर्धन सिंह की कविताएँ
माया!
मुक्त जटिल कुंतल जाल, कंपित!
दुर्बोध—महामाया का भैरवी नृत्य
झम झमा झम झम.
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