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बाबूजी की साइकिल (संस्मरण)
प्यारी साइकिल न जाने किस दिन अज्ञात पथ पर विदा हो गयी। मुझे भी नहीं पता। मेरी स्मृतियों में पिताजी मुस्कुराते हुए साइकिल से घर लौट रहे हैं।


अलारिज, स्पेन का एक चमत्कारिक नगर
यूरोपीय देश अपनी स्मृतियों को मिटाते नहीं, उन्हें भीतर से नया रूप देकर भी पुरातन कला को जीवित रखने की कोशिश करते हैं।


भूकंप-कथा (जो बचा रह गया)
घर के बीज तो हम ख़ुद में छिपाये फिरते हैं इसीलिए सैकड़ों बार उजड़ने के बाद दोबारा स्थापित हो जाते हैं।


काश ऐसे ही फूल हमारी ज़िंदगियों में भी खिल पाएं
बड़ा फूल कह रहा है, बच्चा फूल सुन रहा है : “कल मैं मुरझाकर मर जाऊंगा तब तुम महकाना इस बगिया को!”
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