top of page


दुनिया में एक शहर है, जिस शहर में पूरी दुनिया मिलती है।
मैच शुरू हुआ तो लगा जैसे इधर से उधर बॉल नहीं झूम रही बल्कि लोगों के दिल खिलाड़ियों के पैरों में अटके हुए हैं। बॉल जितनी बार उछलती, उतनी ही बार लोगों के दिल उछलते और गलों की आवाज़ें किसी कोरस में आसमान तक टप्पे खाने लगतीं। गेंद गोलपोस्ट के पास पहुँचती और पूरा इलाक़ा एक साथ साँस रोक लेता। गोल होने पर ऐसा शोर उठता कि लगता, इस शहर की गगनचुंबी इमारतें भी मुस्कुराने लगती होंगी।


अपने-अपने नामवर (सात प्रसंग)
उनकी धोती पीली-सी थी। मैंने सोचा - “क्या नामवर जी नील का प्रयोग नहीं करते। फिर मुझे वे पिता की तरह लगे, मन में सोचा कि कहूं कि लाइए आपके पांव दबा दूँ।”


बाबूजी की साइकिल (संस्मरण)
प्यारी साइकिल न जाने किस दिन अज्ञात पथ पर विदा हो गयी। मुझे भी नहीं पता। मेरी स्मृतियों में पिताजी मुस्कुराते हुए साइकिल से घर लौट रहे हैं।


अलारिज : स्पेन का एक चमत्कारिक नगर
यूरोपीय देश अपनी स्मृतियों को मिटाते नहीं, उन्हें भीतर से नया रूप देकर भी पुरातन कला को जीवित रखने की कोशिश करते हैं।


भूकंप-कथा (जो बचा रह गया)
घर के बीज तो हम ख़ुद में छिपाये फिरते हैं इसीलिए सैकड़ों बार उजड़ने के बाद दोबारा स्थापित हो जाते हैं।


काश ऐसे ही फूल हमारी ज़िंदगियों में भी खिल पाएं
बड़ा फूल कह रहा है, बच्चा फूल सुन रहा है : “कल मैं मुरझाकर मर जाऊंगा तब तुम महकाना इस बगिया को!”
bottom of page
%20(3).png)