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अपने-अपने नामवर (सात प्रसंग)
उनकी धोती पीली-सी थी। मैंने सोचा - “क्या नामवर जी नील का प्रयोग नहीं करते। फिर मुझे वे पिता की तरह लगे, मन में सोचा कि कहूं कि लाइए आपके पांव दबा दूँ।”


कुमार मुकुल की कविताएँ
क्या आधी रात को
मेरी पदचापों पर भूंकते कुत्ते
प्रमाणित करते हैं मेरा अस्तित्व


जीन-बैप्टिस्ट ताती-लुटार्ड की कविताएँ
आदम के बेटों के सिर पर जंग आ चुका है
और मैं कफ़न ओढ़कर सोऊंगा
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