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दुःखी जीवन (कला समीक्षा)
यह उदाहरण केवल उस समय का ही नहीं, बल्कि हर उस दंगे का है, जो उस समय के बाद से लगातार होते ही रहे हैं। देश के अनेक शहरों को हिंसा का स्वाद दिया गया और आगे भी दिया जाता रहेगा। बिना किसी डर और संकोच के। आग ने घरों के अलावा मानवीय संबंधों, उनके सपनों को भी राख कर दिया।


ख़्वाब के मज़बूत पंख (विश्व सिनेमा)
कला आने वाली नस्लों को मनोरंजन के साथ-साथ तमाचे और प्यार के निशान सौंपती है।


दीप्ति कुशवाह की कविताएँ
ऋतुएँ आती रहेंगी
जंगलों के कंधों को छू कर
घास के रंग उलटती-पलटतीं
पहाड़ों के रंग बदलती हुईं
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