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नींद
मूल कहानी : हारुकी मुराकामी अनुवाद : श्रीविलास सिंह बिना नींद के यह मेरा लगातार सत्रहवाँ दिन है। मैं अनिद्रा रोग के संबंध में बात नहीं कर रही हूँ। मैं जानती हूँ अनिद्रा रोग क्या होता है। मुझे इस तरह का कुछ काॅलेज के दिनों में हुआ था- ‘इस तरह का कुछ’ इसलिए क्योंकि मैं निश्चित नहीं हूँ कि तब जो हुआ था वह ठीक-ठीक वही था जिसे लोग अनिद्रा रोग कहते हैं। मैं सोचती हूँ कि एक डॉक्टर मुझे इस संबंध में बता सकता था। लेकिन मैं किसी डॉक्टर के पास नहीं गई। मैं जानती थी कि इससे कोई फायदा न


बिल्लियों का क़स्बा
कौवों का एक झुंड कांव-कांव करता हुआ आकाश के पार चला गया। टेंगो खड़ा हुआ, अपने पिता के पास गया और उनके कंधे पर अपना हाथ रख दिया। "विदा, पिता जी, मैं जल्दी ही फिर आऊंगा।"
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