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आशुतोष प्रसिद्ध की डायरी
दिनों बाद सुकून की कोई लय लगातार सुनता रहा। एक हँसी, एक छेड़ लगातार गूँजती रही। फिसलते रास्ते पर हम सम्भलकर चलते रहे और अन्ततः सही राह पा गए।


टॉमस ट्रांसट्रोमर की कविताएँ
चर्च के भीतर है एक भिक्षा-पात्र
जो धीरे-धीरे उठता है फ़र्श से
और तैरने लगता है भक्तों के बीच।


मैदान वाला ख़ाली मकान (कोरियाई कहानी)
कौन यक़ीन करेगा कि यह खाली घर कभी खुशियों और स्वर-लहरियों से भरा हुआ था? ऐसी खुशियों से जो शायद आपको सिर्फ़ किसी दंतकथा में ही देखने को मिले। मैदान पर चल रही हवाएँ इसकी गवाह हैं। वे जानती हैं कि सुनसान मैदान में अकेला खड़ा यह यह मकान कभी खुशियों से भरा हुआ था।
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