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धर्मेश सिंह की कविताएँ
मेरे भीतर की स्त्री और उसका पुरुष
कभी एक-दूसरे से लिपटकर रो नहीं पाए
कि कहीं उनके प्रेम को
कमज़ोर या कायर न समझ लिया जाए


घनश्याम की कविताएँ
तुम आग को आग नहीं लिख सकते
न रोटी को रोटी लिख सकते हो
न फूल को फूल ही
तुम्हें लिखना इतना ही पसंद है


टर्निंग पॉइंट क्या है पार्टनर!
सारा खेल राजा का है... उसकी सलामती का है। प्यादा तो बर्बादी के लिए, ज़िबह के लिए बना है।
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