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कच्चे दूध की गंध (चीनी कहानी)
जब उनका चेहरा खुशी से दमकता तो उनके मुँह के दोनों छोरों पर डिंपल उभर आते—नई-नवेली माँ बनने का आह्लाद और गर्व उनके चेहरे से फूटा पड़ता था। उनके आसपास से जो भी गुजरता, उसे माँ के ताजे दूध की भीनी-भीनी गंध अपने आगोश में ले लेती।


पाताल की दुखती रगें
पाताल की दुखती रगें कहानी : तौसीफ़ बरेलवी उसे कई रोज़ से अपने हम नफ़्सों के ख़ून की बू आ रही थी लेकिन वह उस बू के पीछे जा भी नहीं सकता था। हाँ उसके अंदर से एक हौल ज़रूर उठ रही थी कि कुछ बहुत भयानक होने वाला है। पूरा जंगल रोज़ जिन परिंदों कि चहचहाहटों से अपनी सुबह करता था, अब वे आवाज़ें ख़ामोश होने वाली थीं। आख़िर ऐसा भी क्या हो गया था...? वह उस पसरती हुई ख़ामोशी का पता लगाना चाहता था लेकिन उससे कुछ करते नहीं बन रहा था। आख़िर वह कर भी क्या सकता था? अपनों के ख़ून की बू के साथ ही दिल को थर्
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