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नसीब का पत्थर
शिकार से कहीं ज़्यादा मेरी दिलचस्पी उस इंतज़ार में थी, जो शिकार से ऐन पहले आता है—मछुआरों को जाल बिछाते देखना, उनका घात लगाए बैठे रहना और साँस तक संभाल-संभालकर लेना, ताकि हवा की कोई लहर उनके जिस्म की गंध परिंदों तक न पहुँचा दे।


आज की ईरानी कविताएँ
जब वह सरहदों पर होती है।
कँटीला तार उसकी स्कर्ट चीर देता है।
फूल चीख़ उठते हैं
और पंखुड़ियाँ कँटीली बाड़ पर
टंगी रह जाती हैं


दुःखी जीवन (कला समीक्षा)
यह उदाहरण केवल उस समय का ही नहीं, बल्कि हर उस दंगे का है, जो उस समय के बाद से लगातार होते ही रहे हैं। देश के अनेक शहरों को हिंसा का स्वाद दिया गया और आगे भी दिया जाता रहेगा। बिना किसी डर और संकोच के। आग ने घरों के अलावा मानवीय संबंधों, उनके सपनों को भी राख कर दिया।
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