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ख़्वाब के मज़बूत पंख (विश्व सिनेमा)
कला आने वाली नस्लों को मनोरंजन के साथ-साथ तमाचे और प्यार के निशान सौंपती है।


इरफ़ान : ख़लिश है ये क्या ख़ला है
यह बात उनके जाने के छः साल बाद भी गले से नीचे नहीं उतरती कि ‘इरफ़ान अब नहीं हैं।’ उनकी फ़िल्में ढूँढ-ढूंढकर देखने का अजीब-सा चस्का चढ़ा हुआ है। बीते सालों में उनके जीवन के दर्जनों काम, जो उनके रहते नज़र में नहीं आए, आज सोशल मीडिया रील्स में काट कर चल रहे हैं।
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