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प्रेमचंद से संवाद (यदि प्रेमचंद आज हमारे बीच होते)
प्रेमचंद से संवाद (यदि प्रेमचंद आज हमारे बीच होते) हिमांशु विश्वकर्मा यदि प्रेमचंद आज हमारे बीच होते, तो वे भारत से क्या कहते और हम उनसे क्या पूछते? यदि सचमुच मुझे आज प्रेमचंद से मिलने का अवसर मिलता, तो शायद सबसे पहले मैं उनसे यही पूछता- “प्रेमचंद जी, आज का भारत देखकर आपको कैसा लगता है?” वे संभवतः मुस्कुराकर कहते- “भारत बदला है, और बहुत बदला है। विज्ञान आगे बढ़ा है, लोकतंत्र मजबूत हुआ है, शिक्षा का विस्तार हुआ है, तकनीक ने जीवन को नई गति दी है। इन उपलब्धियों पर प्रसन्न होना च


कवि प्रभात से दस सवाल
कोई कवि एक समय के बाद अगर लगातार ख़ुद को दोहरा ही रहा है तो इसका मतलब यही है कि वह कवि के रूप में अपनी मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पा रहा है।
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