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लक्ष्मीकांत मुकुल की कविताएँ
चूल्हे की राख-सा
नीला पड़ गया है मेरे मन का आकाश
तभी तुम झम से आती हो
जलकुंभी के नीले फूलों जैसी खिली-खिली
तुम्हें देखकर पिघलने लगते हैं
दुनिया की कठोरता से सिकुड़े
मेरे सपनों के हिमखंड।




चंद्रमोहन की कविताएँ
मैंने मालिकों द्वारा डस्टबिन में फेंकी हुई
कलमों को उठाकर
चिथड़े पन्नों पर
जस का तस छाप दिया
जैसा मैंने जीवन जीया।
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