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काफ़्का की कहानी ‘बांबी’ का अंतर्पाठ
दुर्ग गोदाम में राशन संग्रहण से वह किसी भी संभावित घेराबंदी से महीनों निश्चिन्त रह सकता है पर अपनी सुरक्षा को लेकर उसकी हालत ‘ईमां मुझे रोके है तो खेंचे है मुझे कुफ़्र’ वाली ही बनी रहती है।


रामदरश मिश्र : सहजता जहाँ एक काव्य निकष है
रामदरश मिश्र अपने राजनीतिक होने का शोर नहीं करते। उनकी कविताएं भी किसी प्रकार का शोर नहीं करतीं। एक कवि के रूप में वे अपने आरंभिक दिनों से आश्वस्त हैं कि इस तरह का कोई भी शोर अंततः एक साहित्यिक प्रदूषण है।


ली मिन-युंग का काव्य-संसार
यदि अनुवाद की सुविधा न होती तो संसार कितना निर्धन लगता! वह अनुवाद ही है जिसने भूमण्डलीकृत विश्व ग्राम के समानांतर एक सांस्कृतिक विश्वग्राम की रचना की है। भाषा और साहित्य का एक वैश्विक परिवार निर्मित किया है।
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